अंतर जो काफी है



तू कहाँ सर्दी की चाय सी
मैं कहाँ सर्दी के पानी सा।

तू कहाँ प्लेन के बिज़नेस क्लास सी
मैं कहाँ ट्रेन की जनरल क्लास सा।

तू कहाँ कश्मीर की वादियों सी
मैं कहाँ दिल्ली की हवाओं सा।

तू कहाँ सच्ची सर्जिकल स्ट्राइक सी
मैं कहाँ झूठा राफेल घोटाले सा।

तू कहाँ मोदी की ललकार सी
मैं कहाँ मनमोहन की आवाज़ सा।

तू कहाँ दिल्ली की बहती दारु सी
मैं कहाँ बिहार की बैन दारु सा।

तू कहाँ बाइक के सेल्फ स्टार्ट सी
मैं कहाँ उसके किक स्टार्ट सा।

तू कहाँ ज़ारा के सूट सी
मैं कहाँ सरोजिनी के बूट सा।

तू कहाँ शादी के सजावट सी
मैं कहाँ विदाई की आहट सा।

तू कहाँ महल की राजकुमारी सी
मैं कहाँ गांव के कुम्हार सा।

तू कहाँ सेल के छूट सी
मैं कहाँ जी-एस-टी की लूट सा।

तू कहाँ सर्दी की चाय सी
मैं कहाँ सर्दी के पानी सा।
Satya Prakash Sharma

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *