बचपन साथ नहीं है

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वो बचपन मुझे आज भी याद है
जिसका अक्स भी अब ना साथ है ।

वो बचपन की नींद का सुकून
इन मखमली गद्दों में कहाँ
माँ के गोद वाली नींद
मुझे आज भी याद है।

वो बचपन की शाम का मज़ा
इन हसीन वादियों में कहाँ
पापा के कंधो की वो शाम
मुझे आज भी याद है।

वो बचपन की अमीरी की कीमत
इन कागज़ के टुकड़ों में कहाँ
माँ से मिले 5 सिक्कों की अमीरी
मुझे आज भी याद है।

वो बचपन के सफर वाली बात
इन जहाजों में कहाँ
पापा के स्कूटर का सफर
मुझे आज भी याद है।

वो बचपन के खेल का मज़ा
इस प्लेस्टेशन में कहाँ
गलियों में क्रिकेट का खेल
मुझे आज भी याद है।

वो बचपन के रविवार वाली बात
इन लॉन्ग वीकेंड्स में कहाँ
वो शक्तिमान का इंतज़ार
मुझे आज भी याद है।

वो बचपन की छुट्टियों की ख़ुशी
इन हिलस्टेशन्स में कहाँ
नानी के वहां की छुट्टियाँ
मुझे आज भी याद है।

वो बचपन मुझे आज भी याद है
जिसका अक्स भी अब ना साथ है ।
Satya Prakash Sharma

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