जीवन एक सफर

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आज अँधेरा है तो घबराओ मत।
कदम आगे रखने से कतराओ मत।
जीवन एक कलम की तरह है।
आशा की स्याही से इसे भरे रहना।
निराशा भरे अंत से बचे रहना।


जो आज नहीं हुआ वो कल होगा।
बस चलते जाना जीवन की राह पर।
शिखर पे कल को तू भी होगा।
बस परेशान ना होना पैसे की चाह पर।


घर केवल दीवारों से नहीं बनते।
अक्सर महल ही वीरान है रहते।
छोटे घर के अपने ही जज्बात हैं।
आपसी समझ हो तो फिर क्या बात है।


यह मत भूलो आज जहाँ महल है ।
कल को वहाँ भी एक जंगल था।
समय समय की बात है।
जो आज आगे है कल को वो भी पीछे था।
जो आज है शिखर पर वो भी कभी नीचे था।
Satya Prakash Sharma

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