तिरंगे की कल्पना



रंग बताऊँ तुमको अपना
तो ना हरा और ना ही भगवा।
इनको खुद मे जोड़ के देखो
तो बनता है तिरंगा अपना।

तिरंगे की बात करूँ तो
मेरी अपनी कल्पना है।
बीच मे चक्र सुदर्शन है
और ऊपर नीचे रंगों का मेला।

एक ओर धरती की हरियाली।
तो दूसरी ओर शहीदों का रक्त है।
आसमान के रंग से रंगा हुआ अपना
यह सुदर्शन चक्र है।

इतना अनोखा है देश मेरा।
तभी तो सब इसके ही भक्त हैं।
आयत और आरती वाले
आज तो राष्ट्रगान गाने में मस्त हैं।

चक्र के पीछे सफ़ेद रंग है।
जिसका अपना ही अर्थ है।
शांति और सदभाव सिखाता।
जिसके बिना सब व्यर्थ है।

सच बताऊँ तो मेरे शब्दों में
तिरंगे का यही अर्थ है।
इसका सम्म्मान करना सीखो।
वरना तुम्हारा जीवन ही व्यर्थ है।
Satya Prakash Sharma

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